How To Get NABARD Subsidy Loan in India ? नाबार्ड डेरी सब्सिडी लोन - INDIA DAIRY FARMING

नाबार्ड डेरी सब्सिडी लोन कैसे प्राप्त करते हैं ? | NABARD SUBSIDY LOAN 

डेरी व्यवसाय बहोत ही फायदेमंद व्यवसाय है | दिनों दिन बढती दूध की मांग से आज यह क्षेत्र बहोत विकसित और आकर्षण का केंद्र बन गया है | हालाँकि यह फायदेमंद व्यवसाय है , लेकिन इसे व्यावसायिक तौर पर शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है |

यह भी जानें : नाबार्ड क्या है ? इसकी स्थापना क्यों हुई और नाबार्ड की डेरी सब्सिडी योजना क्या है ?

भारत सरकार द्वारा स्थापित नाबार्ड  के सहयोग से आप कर्ज लेकर अपना डेरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं

ज्यादा जानकारी के लिए सबसे नीचे हमारा विडियो देखें , विडियो देखकर ही आप इसे अच्छे से समझ पाएंगे

नाबार्ड की “डेयरी इंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम” के तहत बैंकों से बहोत अच्छे अनुदान पर सब्सिडी लोन मुहया कराया जाता है | इसके तहत छोटे डेयरी फार्म खोलने, उन्नत नस्ल की गाय अथवा भैंस की खरीद के लिए पांच लाख रुपये की सहायता दी जाती है। यह राशि दस दुधारू मवेशी की खरीद के लिए दिया जाता है।

यह लोन आप (शेड) के निर्माण, दुधारू पशुओं की खरीद, दूध दुहने की मशीन, चारा कुट्टी मशीन या इस उद्देश्य के लिए आवश्यक अन्य उपकरणों आदि के लिए ले सकते हैं |

व्यावसायिक डेयरी के लिए नाबार्ड डेरी सब्सिडी लोन कैसे प्राप्त करें ? | How to get NABARD Subsidy Loan for Dairy Farming

नाबार्ड की डेयरी फार्मिंग सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आप इन स्टेप्स तो फॉलो कर सकते हैं

चरण 1: एक कंपनी या किसी अन्य उपयुक्त व्यापार या गैर सरकारी संगठन इकाई को रजिस्टर करवाएं।

चरण 2: डेयरी फार्म के लिए एक विस्तृत project रिपोर्ट या business प्लान तैयार करें जिसमे बैंक लोन के लिए रिक्वेस्ट भी शामिल हो |

चरण 3: किसी भी व्यावसायिक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, या नाबार्ड द्वारा अधिकृत बैंक में जाएँ और वहां बैंक लोन के लिए अनुरोध करें।

चरण 4: एक बार बैंक ऋण मंजूर हो जाए, उसके बाद आपको बैंक लोन से प्रोजेक्ट शुरू करना होगा

ऋण की सीमा, ऋण चुकाने की अवधि अथवा लोन के आवेदन के लिए या अन्य जानकारियों के लिए आप अपने निकटतम बैंक से संपर्क कर सकते हैं

यह भी जानें : बड़े पैमाने पर दुग्ध-उत्पादन के लिए डेयरी फॉर्म की स्थापना के लिए एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट देना होता है। प्रारंभिक एक व दो महीने के लिए मवेशियों के चारा का इंतजाम के लिए लगने वाली राशि को टर्म लोन के रूप में दिया जाता है। टर्म लोन में जमीन के विकास, बाड़ लगाना, पानी की व्यवस्था, पंपसेट लगाने, दूध के प्रोसेसिंग की सुविधाएं, गोदाम, ट्रांसपोर्ट सुविधा आदि के लिए भी लोन देने के विषय में बैंक विचार करता है लेकिन जमीन खरीदने के लिए लोन नहीं दिया जाता है।

अब हमारा विडियो देखें , विडियो देखकर ही आप इसे अच्छे से समझ पाएंगे

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